Sunday, February 7, 2010

मेरी बगिया को जरा महका तो सही,

छू ले कलियों को,बाजू फैला तो सही,

आज तो फूलों कि निगाहें हैं तुम पर,

चल जरा धीरे से मुस्करा तो सही,

ये जमाना खामोशी से देखे तुझको,

दिल को छू ले कुछ सुना तो सही,

हर तरफ रौशनी से रोशन ही हो,

प्यार की इक शमा जला तो सही !

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